Tuesday, 22 March 2011

ऊर्जा हमारे जीवन की प्रमुख आवश्यकता है


ऊर्जा हमारे जीवन की प्रमुख आवश्यकता है, चाहे वह किसी भी रूप में हो। भोजन, प्रकाश, यातायात, आवास, स्वास्थ्य की मूलभूत आवश्यकताओं के साथ मनोरंजन, दूरसंचार, पर्यटन जैसी आवश्यकताओं में भी ऊर्जा के विभिन्न रूपों ने हमारी जीवन शैली में प्रमुख स्थान बना लिया है। ऐसा भी हो सकता है कि कोई व्यक्ति यह सोचे कि पहले भोजन की समुचित व्यवस्था करूं या कलर मोबाइल खरीद लूं। बिना एयरकंडीशनर के किसी अधिकारी के लिए कार्यालय की कल्पना करना कठिन है।
   जीवन शैली का बदलाव हम इस रूप में भी देख सकते हैं कि जो काम दिन के उजाले में सरलता से हो सकते हैं उन्हें हम देर रात तक अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था करके करते हैं। नियमित व संतुलित दिनचर्या छोड़कर हम ऐसा जीवन जीने के आदी होते जा रहे हैं जो हमें अस्पताल, एक्सरे, ईसीजी, आईसीयू के माध्यम से भयंकर खर्चो में उलझा रहा है। हमारी दिनचर्या दिन प्रतिदिन अधिकाधिक ऊर्जा की मांग करती जा रही है।

परम ऊर्जाः चरम विनाश


परमाणु आयोग की योजना इस अत्यंत जहरीले कचरे को कांच में बदल कर एक ही जगह स्थिर कर देने की है। इस कांच बने कचरे को विशेष प्रकार के शीतगृह में 20 साल तक रखा जाएगा। फिर अंत में उसे किसी ऐसी जगह रखना होगा जहां पानी, भूचाल, युद्ध या तोड़-फोड़ की कोई भी घटना हजारों साल तक उसे छेड़ न सके।परमाणु समझौते को लेकर देश में चल रही बहस में ‘बिजली और बम’ की चिंता प्रमुख है। कहा जा रहा है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते ने हमारे लिए फिर से परमाणु बिजली बनाने का दरवाजा खोल कर हमारा बम बनाने का रास्ता बंद कर दिया है। लेकिन देश में कुछ अपवाद छोड़ दें तो किसी ने भी परमाणु बिजली पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया है। आज दो-चार पीढ़ियों को कोयले के मुकाबले बेहद साफ सुथरी बिजली, प्रकाश देने के आश्वासन पर यह आने

परमाणु ईंधन : भारत-अमेरिका में करार


भारत और अमेरिका ने भारत द्वारा अमेरिका के इस्तेमाल किए गए परमाणु ईंधन का पुनर्प्रसंस्करण करने के बारे में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक असैन्य परमाणु करार को लागू करने का अंतिम चरण माना जा रहा है।इस समझौते के लागू होने के बाद प्रबंधों और प्रक्रियाओं के जरिये भारत अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए गए परमाणु पदार्थों का पुनर्प्रसंस्करण करेगा। यह पुनर्प्रसंस्करण भारत द्वारा स्थापित संयंत्र में किया जाएगा और इस काम को अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के सुरक्षा मानकों के तहत अंजाम दिया जाएगा।

समझौते पर अमेरिकी विदेश विभाग के मुख्यालय में अमेरिका के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री बिल बर्न्‍स और अमेरिका में भारतीय राजदूत मीरा शंकर ने हस्ताक्षर किए। विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ओमाबा के नेतृत्व में विचार-विमर्श के जरिये तय किए गए प्रबंध में ऐतिहासिक भारत अमेरिकी परमाणु सहयोग पहल को सफलतापूर्वक अंजाम देने की मजबूत प्रतिबद्धता झलकती है। यह समझौता अमेरिकी परमाणु ईंधन आपूर्तिकर्ताओं के लिए भारत के साथ कार्य करने की अनिवार्य शर्त थी। भारतीय दूतावास ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों और बढ़ते सहयोग को प्रदर्शित करता है। बयान में कहा कि इस समझौते के जरिये भारत आईएईए के सुरक्षा मानकों के तहत अमेरिका के परमाणु ईंधन का पुनर्प्रसंस्करण कर पाएगा और इससे अमेरिकी कंपनियों को भारत के तेजी से बढ़ रहे परमाणु उर्जा क्षेत्र में भागीदारी का अवसर मिल सकेगा। मीरा शंकर ने इस अवसर पर अपनी टिप्पणी में कहा कि इसके साथ ही हमने परमाणु उर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के मकसद से सहयोग के लिए किए गए हमारे द्विपक्षीय समझौते को लागू करने की दिशा में हमने एक अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि भारतीय और अमेरिकी वार्ताकारों ने जो कठिन और कुशल कार्य किया है उसके चलते एक साल के निर्धारित समय से काफी पहले आपसी विचार विमर्श पूरा कर लिया गया। इससे पता चलता है कि दोनों देशों के बीच साथ में काम करने की आदत तेजी से बढ़ रही है। भारतीय राजदूत ने कहा कि आज हस्ताक्षर किया गया समझौता तथा कुछ दिन पहले नई दिल्ली में आतंकवाद निरोधक पहल भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंधों के मजबूत होने का परिचायक है। उन्होंने शांतिपूर्ण कार्यों के लिए परमाणु उर्जा के इस्तेमाल के मकसद से ऐतिहासिक द्विपक्षीय सहयोग-123 समझौते पर दो साल साल पहले दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत प्रावधान है कि आईएईए सुरक्षा मानकों के तहत भारतीय राष्ट्रीय सुविधा में अमेरिका की परमाणु सामग्री का पुनप्र्रसंस्करण किया जाएगा। (भाषा)
sabhar-http://hindi.webdunia.co

भारत अमेरिका परमाणु सहयोग में अभी भी अ़डचनें


भारतअमेरिका परमाणु सहयोग में अभी भी अ़डचनें
, लेकिन अमेरिका अभी उससे संतुष्ट नहीं है। वह अमेरिकी कंपनियों की सुविधा को देखते हुए उसमें बदलाव चाहता है। उधर, अमेरिकी सरकार सीधे भारत सरकार से इस संदर्भ में संपर्क बनाए हुए है, तो इधर यहां दिल्ली में स्थित अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोयमर भी भारतीय विदेश विभाग से संपर्क साधे हुए हैं।
रोचक यह है कि अमेरिकी सरकार अपनी कंपनियोंंं के लिए तो हर सुविधा चाहती है, लेकिन वह भारत को जरूरी रियायतें देने के प्रति अभी भी उदासीन है। अमेरिका का वायदा था कि भारत के

Sunday, 6 March 2011

भगवान बचाएं परमाणु ऊर्जा से !

जिस पदार्थ की राख या बचा हुआ हिस्सा रेडियोधर्मी होकर अगले ढाई लाख वर्षों तक जहरीला बना रहे, ऐसे पदार्थ के जहरीलेपन की सीमा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भारत में पिछले कुछ वर्षों से ऊर्जा के क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा को लेकर सुनहरे सपने दिखाए जा रहे हैं। यह आलेख परमाणु ऊर्जा के खतरों के बारे में है। पानी-पर्यावरण पर होने वाले प्रभावों को सामने लाने का प्रयास यहां किया गया है।इस वक्त दुनियाभर में 438 परमाणु रिएक्टर कार्यरत हैं। परमाणु ऊर्जा उद्योग के सुझावों के अनुसार जीवाश्म ईंधन पर आधारित ऊर्जा संयंत्रों को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से बदलने के लिए 1000 मेगावाट के 2 से 3 हजार नए परमाणु संयंत्र निर्मित करना होंगे।

तारापुर विद्युत रिएक्टर पुनर्संस्करण संयंत्र का उद्घाटन


प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने महाराष्ट्र के तारापुर स्थित बार्क में 100 टन सालाना क्षमता वाले विद्युत रिएक्टर पुनर्संस्करण संयंत्र का उद्घाटन 7 जनवरी 2011 को किया. तारापुर में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC: Bhabha Atomic Research Centre) में यह दूसरा विद्युत रिएक्टर पुनर्सस्करण संयंत्र हो गया. इसकी स्थापना से नाभिकीय ईंधन चक्र के उप उत्पादों यानी अवशिष्ट (कचरा) पदार्थों का बेहतर प्रबंधन व इस्तेमाल करने में भारत की क्षमता में वृद्धि होनी तय है, स्वदेशी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से निकले अवशिष्ट पदार्थों को विद्युत रिएक्टर पुनर्संस्करण संयंत्र के द्वारा पुनः फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाएगा. फास्ट ब्रीडर रिएक्टर से देश के लिए स्थायी और स्वच्छ ऊर्जा का निर्माण किया जाता है. भारत में कुल 3 परमाणु पुनर्संस्करण संयंत्र हैं: तारापुर, ट्राम्बे और कलपक्कम में. तीनों की कुल सालाना क्षमता 230 टन है.

वर्तमान एवं भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरेनियम का पुनर्चक्रण एवं उचित उपयोग भारत जैसे विकासशील देश के लिए आवश्यक है.
jagranjosh

परमाणु विद्युत ऊर्जा का उत्पादन बढ़ा


उच्च संवर्धित यूरेनियम की उपलब्धता के कारण परमाणु विद्युत उत्पादन में वर्ष 2009 में बढ़ोतरी देखी गई. अप्रैल-दिसंबर 2009 में यह बढ़ोतरी 19% पाई गई जबकि सिर्फ दिसंबर 2009 में यह 39% पाई गई .झारखंड के तुरमडीह मिल से उच्च संवर्धित यूरेनियम की दोगुनी आपूर्ति के कारण राजस्थान, मद्रास और तारापुर एटमिक पावर स्टेशन में विद्युत उत्पादन बढ़ा. फ्रांस और रूस से मिलने वाले परमाणु ईंधन भी बढ़ोतरी के कारण रहे. साथ ही असंतुलित मानसून के वजह से जल विद्युत ऊर्जा में कमी देखी गई

कैगा अटॉमिक पावर प्लांट की चौथी इकाई प्रारम्भ


कर्नाटक की कैगा अटॉमिक पावर प्लांट की चौथी इकाई का संचालन 27 नवंबर 2010 को शुरू हो गया. यह भारत का 20वां न्यूक्लियर पावर प्लांट है. इस इकाई की उत्पादन क्षमता 220 मेगावाट है. इसके शुरू होने के बाद देश की परमाणु ऊर्जा के उत्पादन की क्षमता 4560 मेगावाट से बढ़कर 4780 मेगावाट हो गई.

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