Tuesday, 26 October 2010

परमाणु ऊर्जा से पैदा होगी 63,000 मेगावॉट बिजली

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम परमाणु ऊर्जा निगम ने अगले 25 सालों में 63,000 मेगावाट परमाणु बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने हाल ही में आठ स्थानों पर 15 नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी है।
परमाणु ऊर्जा निगम के अध्यक्ष एस.के. जैन ने इस बात का खुलासा किया। जैन ने बताया, "2032 तक हम 63,000 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन करने में सक्षम होंगे। इसके लिए देशी तकनीक के अलावा विदेशी कंपनियों की सहायता भी ली जाएगी।"

जैन ने कहा कि वे राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन की पांचवी और छठवीं इकाई की मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं जिससे कि इन दोनों इकाइयां अगले साल जनवरी तक काम करना शुरू कर सकें।
उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि अगर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) इस महीने मंजूरी दे देती है तो राजस्थान में पांचवी इकाई नवंबर तक और छठी इकाई जनवरी तक पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देगी।"
राजस्थान की ये दोनों परमाणु ऊर्जा इकाइयां आईएईए की भारत विशेष सेफगार्ड समझौते के अधीन आती हैं, जिससे ये इकाइयां आयातित ईंधन प्राप्त कर सकेंगी। इसके अलावा स्वदेशी तकनीक से तैयार किए जा रहे फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का काम अभी प्रगति पर है।
केंद्र सरकार ने हॉल में आठ स्थानों पर 15 नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है जिसमें से चार परमाणु संयंत्रों का निर्माण फ्रांस, अमेरिका और रूस की कंपनियां करेंगी। जैन ने देश के परमाणु संयंत्रों में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश की संभावना से इंकार करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बाद पहले चरण का विस्तार भारत की सार्वजनिक कंपनियों और विदेशी कंपनियों के गठजोड़ के माध्यम से किया जाएगा। परमाणु ऊर्जा निगम ने हाल में तीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, नेशनल एल्युमिनियम कंपनी और एनटीपीसी के साथ समझौता किया है।

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